सुना है फिर बजट आ रहा है| साल दर साल संसद में बजट जा रहा है आ रहा है, वित्त मंत्री का पिटारा खुलता जा रहा है राजनीति की चासनी में घुलता जा रहा है| कितने वित्त मंत्री आये गए पर ये बजट संसद में अपनी हाजरी हर वर्ष दर्ज करा रहा है| आमतौर पर वर्ष के फ़रवरी माह में आने वाला बजट अपने आप में आग का गोला होता है शायद यही कारण है कि इस बजट के पारित होते ही मौसम में कुछ गर्मी कि दस्तक महसूस होने लगती है| बजट के आने की सुगबुगाहट होते ही शेयर बाज़ार के दलाल अपनी कमाई के जुगाड़ में लग जाते हैं|15 दिन पहले से बाज़ारों के उतार-चढ़ाव का खेल चालू हो जाता है, प्रतीत होता है अगले वित्त वर्ष का बजट पिछले साल की कमाई पर भी हाथ साफ़ कर देगा| आगे पढ़ें >>
